Monday, 24 June 2024
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एक बच्चों की किताब: जो सिखाए “नि:स्वार्थ प्रेम” क्या होता हैं और उसका सच्चा अर्थ

The Giving Tree Book: क्या आप कभी बच्चों की कहानी पढ़ते हुए रोए हैं? अगर आपको पाँच मिनट में ख़तम होने वाली कोई ऐसी किताब पढ़ने को मिले जो आपको जीवन भर का संदेश दे सके, तो क्या आप उसे पढ़ेंगे?

प्रतिभाशाली और बहुमुखी राइटर Shel Silverstein द्वारा खूबसूरती से लिखा और चित्रित किया गई उनकी किताब हैं जो बच्चो के साथ बड़ो मैं भी बहुत प्रिय हैं।

आज हम एक किताब “The Giving Tree” की बात करेंगे अगर आप कुछ नया और पढ़ने के शौक़ीन हैं तो आपके लिए किताब का ध्यान में लेना चाहिए अगर हो सके तो इसे पढ़े

यह एक पेड़ और एक लड़के के बिच की कहानी हैं और बुक मैं पिक्चर के साथ इसको बताया गया हैं इस कहानी मैं हर दिन लड़का पेड़ के पास आता और उसके सेब खाता, उसकी डालियों से झूलता या उसके तने से नीचे सरकता…और पेड़ उसके साथ हो कर खुश रहता।

लेकिन जैसे-जैसे लड़का बड़ा होता गया, वह पेड़ से और अधिक चाहता गया और पेड़ देता रहा और देता रहा और देता रहा।

यह एक कोमल कहानी है, जो दुख से भरी हुई है, सांत्वना से भरी हुई है। शेल सिल्वरस्टीन ने सभी उम्र के पाठकों के लिए एक संदेश दिया है और और समझाया हैं की “नि:स्वार्थ प्रेम” क्या होता हैं और हमें के हमारे माता-पिता के नि:स्वार्थ प्रेम को हमें तोडना नहीं चाहिए यह मार्मिक अर्थ समजाता हैं।

About Writer Shel Silverstein:

Shel Silverstein गद्य और कविता की कई प्रिय पुस्तकों के लेखक-कलाकार थे। वह एक कार्टूनिस्ट, नाटककार, कवि, कलाकार, रिकॉर्डिंग कलाकार और ग्रैमी विजेता, ऑस्कर-नामांकित गीतकार थे।

शेल सिल्वरस्टीन को शायद हमेशा उनकी असाधारण पुस्तकों के लिए सबसे अधिक पसंद किया जाएगा। शेल की पुस्तकें अब 47 से अधिक विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित होती हैं। 1999 में उनकी मृत्यु से पहले प्रकाशित होने वाली अंतिम पुस्तक Falling Up थी।

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The Giving Tree Book के बारे में विस्तार से जानें


कितने समय बाद मैं रोया! और वह भी एक बच्चों की कहानी पढ़कर! मेरे ध्यान में एक ऐसी किताब आई जिसका हरे रंग का कवर पेज और एक सेब के पेड़ का फोटो , पेड़ के नीचे खड़ा एक बच्चा और पेड़ से गिरता हुआ एक सेब। और बुक का नाम था, “The Giving Tree”

मूलतः यह कहानी एक सेब के पेड़ और एक बच्चे के बीच के रिश्ते के बारे में है। शुरुआत में बच्चा प्रतिदिन उस सेब के पेड़ के साथ खेलने जाता है। उसके तने पर चढ़ जाता है। हिंचका इसकी शाखाओं को खाता है। पेड़ से सेब को तोड़कर खाया जाता है पेड़ के साथ छुप्पन छुपाई खेलता है और अंत मैं थकावट के कारण उसी पेड़ की छाया में सो जाता है।

लड़के को पेड़ बहुत पसंद है। बच्चा अपनी दोनों बाँहों को तने के चारों ओर लपेटकर पेड़ से लिपट जाता है। एक बच्चा पेड़ के तने पर दिल बनाकर उसमें ‘Me + T’ (मैं और पेड़) लिखता है। बच्चे को अपने साथ और आस-पास खेलते हुए देखकर पेड़ बहुत खुश होता है।

धीरे-धीरे समय बीतता गया और लड़का बड़ा हो गया। अब लड़का अकेला नहीं आता। वह अपनी गर्लफ्रेंड को भी साथ लाता है। वो और उसकी गर्लफ्रेंड एक पेड़ की छाया में एक-दूसरे से प्यार करते हुए घंटों बात करते हैं। पेड़ के तने पर लड़के ने एक बार फिर दिल बनाया है और इस बार उसने अपना नाम अपनी प्रेमिका के नाम के साथ लिखा है।

लड़का अब पेड़ के साथ खेलने की बजाय अपनी प्रेमिका के साथ व्यस्त हो गया। पेड़ को अकेलापन महसूस होता है, लेकिन पेड़ लड़के को अपनी प्रेमिका से बात करते हुए खुश देखकर पेड़ खुश हो जाता है।

लेकिन एक दिन लड़का उदास हो जाता है।


एक दिन लड़का उदास चेहरा लेकर पेड़ के पास आता है। तब पेड़ उससे कहता है, ‘आओ बेटे, आओ! मेरी छाया में खेलो मेरी डाल पर चढ़ो। मेरी शाखाओं पर झूलो. एक सेब उठाओ और खाओ और खुश रहो। लड़का कहता है, ‘अभी मेरी खेलने की उम्र नहीं है। मैं चीजें खरीदना चाहता हूं। क्या आप मुझे रुपये दे सकते हैं?”

लेकिन पेड़ लड़के को पैसे नहीं दे पाता


पेड़ कहता है, ‘मेरे पास रुपये नहीं हैं, लेकिन मेरे पास सेब हैं। तुम वो सारे सेब बेच दो और पैसे कमाओ। उस रुपये से जो चाहो खरीद लो और खुश रहो। लड़का सारे सेब तोड़ लेता है और पेड़ खुश हो जाता है।

अब लड़का पेड़ को मिलने नहीं आता और जब आता है तो क्या मांगता है?


एक लड़का जो बचपन में रोज आता था, अब अनियमित आने लगा। कई बार तो महीनों तक नजर नहीं आता। पेड़ उदास हो जाता है। एक दिन वह अचानक लौटता है और पेड़ से कहता है, ‘मुझे एक घर चाहिए।’ पेड़ उसे अपनी सभी शाखाएँ और लकड़ी देता है और लड़का उससे अपना घर बनाता है। कुछ देर बाद लड़का कहीं दूर जाने के लिए नाव मांगने आता है। पेड़ उसे अपना तना प्रदान करता है। लड़का पेड़ के तने को काटकर नाव बनाता है और पेड़ उसे खुश देखकर खुद खुश होता है।

जब लड़का बुड्ढा हो जाता है, तो वह फिर से पेड़ के पास आता है, लेकिन इस बार वह क्या मांगता है?


वर्षों बाद जब लड़का बूढ़ा हो गया, तो वह फिर पेड़ के कटे हुए तने के पास से गुज़रा। पेड़ कहता है, “अफसोस, मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ भी नहीं है।” तब लड़का बोलता हैं की अब मेरे पास दांत नहीं, इसलिए सेब नहीं खा सकता। अब मुझमें इतनी ताकत नहीं है कि पेड़ पर चढ़ सकूं। मुझमें शाखाओं को खींचने की भी ताकत नहीं है।

अब मुझे कुछ नहीं चाहिए. बहुत थक गया हूं अब मैं बस बचे पेड़ के सहारा लेकर बस थोड़ी देर सोना चाहता हूँ। ” और पेड़ कहता है, ‘आओ बेटा, आराम करो।’

यह कहानी यहीं समाप्त हो जाती है, लेकिन अगर आप इसे समझने की कोशिश करें तो यह हमारे लिए एक बड़ी सीख छोड़ जाती है।

कहानी यहाँ संपन्न होती है लेकिन इसका अंत हमें सोचने पर मजबूर कर देता हैं और शायद हमारी भूतकाल की गलतियों का एहसास कराता हैं। इस पूरी कहानी में पेड़ की जगह मुझे मेरी माँ और पापा नज़र आये ।

आप लोगोने किसको देखा? खुशी की तलाश में खोए हम अक्सर अपनी मां या पिता के पास पहुंचते हैं और कुछ न कुछ मांगते हैं। हर बार वह हमें देकर मांगे पूरी करकर प्रसन्न होते हैं और हम पाकर भी दूसरे के पास हमसे अच्छा और ज्यादा हैं देखकर प्रसन्न नहीं हो पाते।

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, उसके साथ हमारा रिश्ता, व्यवहार और मांगें बदल जाती हैं। लेकिन हमारे माता-पिता की देने और देकर संतुष्ट होने की प्रवृत्ति कभी नहीं बदलती। और समय के साथ उसका समय देना कम हो जाता है और उसकी उदारता बढ़ जाती है।

जीवन के दूसरे हिस्से में हम इतने बूढ़े हो जाते हैं कि हम भूल जाते हैं कि हमारे माता-पिता ने हमें खुश करने के लिए अपनी खुशियाँ त्याग दीं और जब हमें समज में आता हैं, तो हम बहुत बूढ़े हो जाते हैं और हम उनके प्रति अपने समर्पण को याद करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।

अंत में, वे हमसे ज्यादा उम्मीद नहीं करते हैं, वे बस यही चाहते हैं कि हमारे बेटा हमारे पास आए और हमसे बात करे और उनके अंतिम क्षणों में उनके साथ रहे।

आज हम देखते हैं कि कैसे बेटे जरूरत खत्म होने पर माँ बाप का साथ छोड़ देते हैं या उनके अंत समय में मैं उनकी सेवा भी नहीं करते या उनके साथ कहीं ले जाने में उनको शर्म आती है।

हाल ही में मैं एक घटना सामने आई। जिसमें गुजरात के सूरत शहर में माता पिता ने अपने बच्चे को विदेश पढ़ने भेजने के लिए पैसे उधार लिए और उनके बेटे को कनाडा भेजा था लेकिन कनाडा जाने के बाद 4 साल तक उनसे बात नहीं की और बेटे ने माता-पिता से रिश्ता तोड़ दिया। अपने बेटे से ये धोखा वे सहन नहीं कर पाए और दोनो माता-पिता ने आत्महत्या कर ली। “Read more news related to this by clicking on this link.”

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