Wednesday, 24 July 2024
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जानें क्या है Egypt के पिरामिड और उसके अमूल्य खजाने के पीछे की कहानी?

आप को मिस्र के पिरामिड देख के यहा लगता होगा की किसने ये मिस्र के पिरामिड बनाये होंगे कैसे इतनी ऊंची पिरामिड बनी होगी। क्या है इसके पीछे का रहस्य। 1789 की गर्मियों में नेपोलियन अपनी विशाल सेना के साथ Egypt(मिस्र) को जीतने के लिए निकला। सेना में सैनिकों के साथ-साथ कई पुरातत्वविद्, रसायनज्ञ और गणितज्ञ भी शामिल थे, क्योंकि नेपोलियन मिस्र को जीतना चाहता था और वहां के Pyramids और Sphinx के अवशेषों के बारे में जानना चाहता था।

नेपोलियन अलेक्जेंड्रिया और काहिरा से होते हुए भूमध्य सागर पार करके गीज़ा पहुंचा, जहां मिस्र का सबसे बड़ा पिरामिड स्थित था। यह पिरामिड 450 फीट ऊंचा और 13 एकड़ में फैला हुआ था। परंतु ब्रिटिश एडमिरल नेल्सन से पराजित होने के बाद उन्हें जल्द ही मिस्र से भागना पड़ा, लेकिन जो विद्वान मिस्र आए वे पिरामिडों का रहस्य जानने के लिए मिस्र में ही रुक गए।

आर्कियोलॉजिस्ट के पास Egypt के Pyramids और Sphinx को ले कर बहुत प्रश्न थे


गीज़ा का पिरामिड पांच हजार साल पहले बनाया गया था। पुरातत्वविदों को कई सवालों का सामना करना पड़ा ये पिरामिड क्यों बनाए गए और इनके अंदर क्या है? सैकड़ों टन वजन वाले पत्थरों को इतनी ऊंचाई तक कैसे ले जाया जा सकता है? स्मारकों पर अंकित अज्ञात लिपि को पढ़ना असंभव था। इसलिए इन सभी सवालों का जवाब उस वक्त नहीं मिल सका। तभी अचानक एक ऐसी घटना घटी जिसने इस अज्ञात लिपि का रहस्य उजागर कर दिया।

फ्रांसीसी पुरातत्वविदों को Rashid(Rosetta) जो Egypt की एक सिटी हैं नामके स्थान पर नील नदी के तट पर पत्थर का एक चौकोर टुकड़ा मिला। जिस पर तीन प्रकार की लिपियों का उपयोग करके कुछ लिखा जाता था। मिस्र के स्मारकीय शिलालेखों में उन्हीं तीन लिपियों का उपयोग किया गया था।

जिनमें से एक यूनानी(Greek) लिपि थी, जिसे एक विद्वान ने पढ़ा और पाया कि रोसेटा स्टोन पर अंकित अन्य दो लिपियों में एक ही लिपि है। ऐसा लगता था कि इन विद्वानों को स्मारकों के रहस्य को खोलने की चाबी मिल गई थी और उन्होंने स्मारकों की दीवारों पर उकेरी गई चित्रलिपि को पढ़कर धीरे-धीरे मिस्र के Pharaoh (फिरौन) राजाओं और उनकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी।

Flinders Petrie नाम के एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् को पिरामिड में कई चीजें मिलीं।


फ्लिंडर्स पेट्री नाम के एक ब्रिटिश पुरातत्वविद् ने पिरामिडों में पाई गई हर चीज का लिस्ट दिया, जिससे पता चला कि पिरामिड मिस्र के फिरौन शाषको के लिए बनाए गए स्मारक थे जिनमें उनके शवों को दफनाया और संरक्षित किया गया था। उनके शवों के साथ भोजन, कपड़े, आभूषण, बर्तन, हथियार आदि भी दफना दिए जाते थे। लंदन में फ़्लिंडर्स पेट्री के नाम पर एक म्यूजियम है जिसका नाम “Petrie Museum of Egyptian Archaeology” है जहाँ आप सब कुछ देख सकते हैं।

दुनिया को पता चला कि पांच हजार साल पहले नील नदी के इस क्षेत्र में एक समृद्ध और सभ्य समाज रहता था और मिस्रवासियों ने पिरामिड बनाए थे। वे बहुत समृद्ध थे और सोने और जवेरात से भरपूर समृद्ध जगह थी।

उन्होंने शायद सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में पृथ्वी की गति और प्रकाश की गति को जानने के लिए वेधशालाओं, कैलेंडर या इसे शायद राजा की कबर बनाने के लिए उपयोग कियागया होगा। कुछ लोग तो इसे एलियन ने इस पिरामिड को बनाया होगा भी कहते हैं।

हॉवर्ड कार्टर ने 1929 में कब्र और खजाने की खोज की


1929 में हॉवर्ड कार्टर नाम के एक अंग्रेज पुरातत्वविद् ने एक महत्वपूर्ण खोज की। ब्रिटेन के आर्कियोलॉजिस्ट हॉवर्ड कार्टर ने मिश्र के ‘वैली ऑफ किंग्स’ (Valley of Kings) में किंग तूतनखामेन की कब्र ढूंढ निकाली वह वहां 20 साल से काम कर रहा था और तूतनखामेन की कब्र की तलाश कर रहा था। खुदाई करते समय उन्हें एक भूमिगत सीढ़ी और एक सीलबंद दरवाजा मिला। जब इस दरवाजे में एक छेद किया गया और उसमें से रोशनी गुजरी और उसने अंदर देखने की कोशिश की तो उसकी आंखें फटी रह गईं।

ये वस्तुएँ न केवल मिस्र की कला और समृद्धि का प्रमाण थीं, बल्कि मिस्र के फिरौन की जीवनशैली पर भी प्रकाश डालती थीं। वर्षों के निरंतर अन्वेषण से दुनिया को एक महान सभ्यता के बारे में जानकारी मिली और पिरामिडों के पीछे छिपी प्राचीन सभ्यता अब दुनिया के लिए अज्ञात नहीं रही।

तूतनखामुन कौन था?


प्राचीन मिस्र में फिरौन या फैरो (Pharaoh) का शासन था. साल 1332 बी.सी. में तूतनखामेन (Tutankhamun) फिरौन बने. वह प्राचीन मिस्र के अठारहवें राजवंश का अंतिम फिरौन थे. तूतनखामेन ने जब गद्दी संभाली तो उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 9 साल थी. मिस्र युद्ध के मुहाने पर खड़ा था और पड़ोसी नोबिया से लड़ाई चल रही थी. तूतनखामेन जब तक होश संभालते, कुछ समझने लायक होते तब तक उनका निधन हो गया. सिर्फ 10 साल फिरौन की गद्दी संभालने के बाद 19 साल की उम्र में तूतनखामेन की मौत हो गई। – From a News18 article

Tutankhamun-gold-mask
When archaeologists found King Tutankhamun’s gold mask in 1922, it was the first time the treasure had been seen in over 3,000 years.

कब्र के अंदर क्या-क्या खजाना मिला?


तूतनखामेन (Tutankhamun Tomb) की कब्र के अंदर से बेशुमार खजाना मिला. कुल 5000 से ज्यादा सोने और हीरे-जवाहरात के आर्टिफैक्ट्स मिले. जैसे कपड़े, बेशकीमती गहने, बिस्तर, रथ, तकिया, मनोरंजन की चीजें, सिंहासन आदि. ठोस सोने की बनी कई छोटी-छोटी मूर्तियां भी मिलीं. nationalgeographic के मुताबिक तूतनखामेन की कब्र में इतनी चीजें मिली कि उसे गिनने और एक-एक चीज अलग करने में दस साल का वक्त लग गया – From a News18 article

कब्र मिलने के बाद मौत का सिलसिला


तूतनखामेन की कब्र की खोज के साथ मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया पहले कब्र ढूंढने मैं जो मजदूर थे उनकी मौत हुई लेकिन बाद मैं 1923 में जब लॉर्ड कार्नारवॉन जिन्होंने हॉवर्ड कार्टर को खोज करने के लिए पैसे दिए थे उनकी रहस्मय तरीके से मौत हो गई कहा जाता हैं की जिसने भी वो खजाने मैं से कुछ लिए हैं उन सबकी मौत हो गई

Tutankhamun की ममी का X-ray करने वाले रेडियोलॉजिस्ट आर्किबेल्ड डगलस एक्सरे के तुरंत बाद बीमार पड़े और 3 दिन के अंदर उनकी मौत हो गई. फिर लॉर्ड कार्नारवॉन के सेक्रेटरी रिचर्ड बेडेल की मौत हुई. रिचर्ड मकबरे के अंदर घुसने वाले दूसरे व्यक्ति थे. इसके बाद अमेरिका की इजिप्टोलॉजिस्ट आयरन एंबर की मौत हुई.

इसके बाद इसे ‘Curse of the Mummy‘ या ‘Curse of King Tut‘ यानी राजा तूतन का श्राप कहा जाने लगा।

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