Saturday, 20 July 2024
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Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी का क्या होता है? जानिए इसके उपयोग के खास कार्य

जगन्नाथ रथ यात्रा 2024 में 7 जुलाई से शुरू होकर 16 जुलाई को समाप्त होगी। यात्रा के दौरान जिन रथों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और सुभद्रा जी सवार होते हैं उनका निर्माण कार्य अक्षय तृतीया के दिन से ही शुरू हो जाता है। अक्षय तृतीया के दिन विधिवत रूप से लकड़ियों की पूजा के बाद निर्माण कार्य करने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रथ यात्रा की समाप्ति के बाद रथ की लकड़ी का इस्तेमाल किन कार्यों में किया जाता है? अगर नहीं तो आज इसी बारे में हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे।

जगन्नाथ रथ यात्रा भारत की सबसे प्रतिष्ठित और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली इस वार्षिक रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को बड़े धूमधाम से रथों पर विराजमान करके नगर भ्रमण कराया जाता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

रथ यात्रा के दौरान भगवान के तीनों देवताओं के लिए तीन विशाल और भव्य रथ बनाए जाते हैं, जो पूरी तरह से लकड़ी से बने होते हैं। इन रथों का निर्माण हर साल नए सिरे से किया जाता है और इसमें बेहतरीन कारीगरी और कला का प्रदर्शन किया जाता है।

लेकिन, एक सवाल जो लोगों के मन में अक्सर उठता है, वह यह है कि यात्रा के बाद इन विशाल रथों की लकड़ी का क्या होता है? इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि जगन्नाथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी का उपयोग किन-किन खास कार्यों में किया जाता है।

रथ निर्माण की प्रक्रिया

रथों का निर्माण विशेष रूप से चयनित लकड़ी से किया जाता है, जो ज्यादातर ओडिशा के जंगलों से लाई जाती है। इस लकड़ी को काटकर और आकार देकर कुशल कारीगर रथ का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया बहुत ही धार्मिक और परंपरागत होती है, जिसमें कई अनुष्ठान और पूजा विधियाँ भी शामिल होती हैं। रथों को सजाने के लिए रंग-बिरंगे कपड़े और अन्य सजावटी वस्त्रों का भी उपयोग किया जाता है।

रथ यात्रा के बाद लकड़ी का उपयोग

जगन्नाथ रथ यात्रा के समाप्त होने के बाद रथों की लकड़ी का पुनः उपयोग किया जाता है। इसे फेंका नहीं जाता, बल्कि विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों में इसका महत्व बना रहता है। आइए जानते हैं रथ की लकड़ी का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जाता है:

  1. मंदिर की मरम्मत और निर्माण कार्य
    रथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी को जगन्नाथ मंदिर और इसके परिसर के मरम्मत और निर्माण कार्यों में उपयोग किया जाता है। यह लकड़ी मंदिर की संरचना को मजबूत बनाने में मदद करती है और इसके धार्मिक महत्व के कारण इसे विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है।
  2. रसोई और भोजनालय में उपयोग
    मंदिर परिसर में स्थित रसोई (आनंद बाजार) में भी इस लकड़ी का उपयोग होता है। भगवान जगन्नाथ के लिए बनने वाले प्रसाद और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए इस लकड़ी का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। यह माना जाता है कि रथ की लकड़ी से बने भोजन का विशेष धार्मिक महत्व होता है।
  3. धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग
    रथ की लकड़ी का उपयोग कई अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है। विशेष हवन, यज्ञ और पूजा के दौरान इस लकड़ी का उपयोग पवित्र अग्नि के लिए किया जाता है। इससे अनुष्ठान का महत्व और भी बढ़ जाता है।
  4. स्थानीय हस्तशिल्प और कला
    रथ की लकड़ी का उपयोग स्थानीय कारीगरों द्वारा हस्तशिल्प और कला के रूप में भी किया जाता है। इससे बनाई गई वस्तुएं धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। लोग इन्हें अपने घरों में पूजा और सजावट के लिए रखते हैं।
  5. धर्मार्थ कार्य
    कुछ मात्रा में रथ की लकड़ी को धर्मार्थ कार्यों के लिए भी दान कर दिया जाता है। इससे समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता की जाती है। इस प्रकार, यह लकड़ी समाज के कल्याण में भी योगदान देती है।

लकड़ी का पर्यावरणीय दृष्टिकोण

जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी का पुनः उपयोग पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इसे फेंका नहीं जाता, बल्कि इसे पुनः उपयोग में लाकर संसाधनों का सही तरीके से उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता और संसाधनों का संरक्षण भी होता है।

निष्कर्ष

जगन्नाथ रथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी का उपयोग विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यों में किया जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि इसका पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व भी बहुत बड़ा है। इस लकड़ी का पुनः उपयोग संसाधनों के सही और प्रभावी उपयोग का एक उदाहरण है।

इस प्रकार, जगन्नाथ रथ यात्रा न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, बल्कि यह हमें संसाधनों के पुनः उपयोग और संरक्षण की भी सीख देती है। उम्मीद है कि इस ब्लॉग से आपको रथ यात्रा के बाद रथ की लकड़ी के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी मिली होगी।

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