Wednesday, 24 July 2024
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गगनयान मिशन: एक औद्योगिक नजरिया – Passengers, Economy और Achievements

भारत सरकार ने आज गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में भारतीय अवधारकों को पसन्द किया। इस मिशन में चार एयरफोर्स पायलट्स को शामिल किया गया है। इस मिशन के तहत, तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में भेजा जाएगा, और उन्हें तीन दिनों के लिए वहीं रहना होगा।

भारत की अंतरिक्ष संस्था, ISRO, इस मिशन की तैयारी के लिए लगातार परीक्षण कर रही है। पिछले साल October में एक प्रभावाशाली परीक्षण में सामने आया कि रॉकेट में अव्यवस्था होने पर चालक दल को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

गगनयान मिशन: भारतीय अंतरिक्ष अवधारकों की पसन्द

इसरो के तिरुवनंतपुरम स्थित केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में ये चार अंतरिक्ष यात्री राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थित थे। इन चारों वायुसेना के अधिकारियों का पसन्द किया गया था। उनके नाम हैं ग्रुप कैप्टन Prashant Balakrishnan Nair, ग्रुप कैप्टन Ajit Krishnan, ग्रुप कैप्टन Angad Pratap, और विंग कमांडर Shubhanshu Shukla.

Prime Minister Narendra Modi और ISRO Chief S Somnath ने साथ मिलकर एक सानी अवसर पर सुनहरे पंखों से सजी उनकी वर्दी में विशेष बैज़ लगाया। इस मौक़े पर, उन्हें ”Honor of India’ के रूप में सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर उच्चारित कहा, “ये चार व्यक्तित्व नहीं, किन्तु 140 करोड़ भारतवासियों के सपनों को साकार करने वाले शक्तिशाली किरदार हैं। 40 सालों के बाद एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को तैयार किया गया है। इस बार समय हमारा है, उलटी गिनती भी सुरु हों चुकी है ,और रॉकेट भी हमारा है।

अंतरिक्ष यात्रियों की पसन्द: चुनाव प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तत्व:

अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि इन व्यक्तियों को चयनित किया गया है, जो मानसिक और शारीरिक परीक्षणों के माध्यम से एयर फोर्स के अनुभवी पायलटों के एक विशेष समूह से चुने गए हैं।

इन अधिकारियों ने रूस में 13 महीनों तक व्यायाम और शिक्षण का कठिन प्रोग्राम पूरा किया है, और अब भारत में भी उसी प्रशिक्षण को जारी रख रहे हैं। इस प्रोग्राम के दौरान जारी किया गया वीडियो दर्शाता है कि इन अधिकारियों ने जिम में मेहनत की है, साथ ही स्विमिंग और योगा जैसे व्यायामों को भी अपनाया है।

इसरो ने मंगलवार को ‘Vyom-Mitra’ के एक पूर्वावलोकन दिखाया। ‘व्योम-मित्र’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘Companion Of Space’। यह एक रोबोट है जिसे इस साल आकाश में रवाना होना है।

‘गगन यान मिशन’ भारत की पहली मानव उड़ान को अंतरिक्ष में ले जाने जा रहा है, और इस के लिए इसरो केंद्र पर काफ़ी तैयारी जारी है।

वित्तीय अनुमान: गगनयान मिशन की आर्थिक अनुमानित क़ीमत

भारत की यदि इस परियोजना में सफलता मिलती है, तो वह अंतरिक्ष में मनुष्य पहुंचाने वाला चौथा राष्ट्र बनेगा। पहले सोवियत संघ, अमेरिका, और चीन ने अंतरिक्ष में मनुष्य को सफलतापूर्वक पहुंचाया है।

पिछले साल, भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की। 2023 के अगस्त महीने में, भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट पहला देश बना।

इसके कुछ हफ्ते बाद, इसरो ने सूर्य की दिशा में भारत का पहला ऑब्ज़र्वेशन मिशन “आदित्य-एल1” भेजा। इस मिशन के दौरान सूर्य पर नजर रखी जाएगी, जब वह कक्षा में मौजूद होगा।

भारत ने इन सभी पहलुओं के साथ ही आगामी दशकों के लिए भी विस्तृत योजनाओं का एलान किया है।

भारत ने घोषणा की है कि वह 2035 तक अपना पहला अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा और 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन को साकार करेगा।

कौन-कौन से लोगो ने शुभकामनाएं दीं

1.केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने इस मौके पर वायु सेना के पायलटों को शुभ कामना दी है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा है कि ‘हमारे पहले अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के लिए चयनित वायु सेना पायलटों को बहुत बधाई।

2.केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी इस मौके पर देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में उचित गर्वान्वित किया है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर एक वीडियो सहकारित किया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी इस अभियान के लिए विभिन्न वायुसेना पायलटों से मिलते हुए दिख रहे हैं।

3.केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणा और समर्थन के परिणामी, आज भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी भूमिका में आगे बढ़ रहा है।

4.गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से प्रेरित होकर लिखा है – “इस बार समय हमारा है, गिनती भी हमारी है और रॉकेट भी हमारा है।

HSFC: गगनयान में योगदान और कार्य

HSFC (मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र) का मुख्य काम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के गगनयान कार्यक्रम को बढ़ावा देना है। यह उसके केंद्रों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और उद्योगों को एक साथ लाने के माध्यम से पूरे भारत में काम करता है। HSFC मानवों को अंतरिक्ष में भेजने से जुड़े कामों का मुख्य केंद्र है, इसलिए वह सुरक्षा और विश्वसनीयता के मानकों का पालन करता है। इसके अतिरिक्त, यह नई तकनीकों का अनुसंधान करता है, जैसे कि अंतरिक्ष में सांस लेने के लिए जरूरी सिस्टम, मानवों के लिए आवश्यक डिज़ाइन, अंतरिक्ष जीव विज्ञान, अंतरिक्ष यात्रियों की प्रशिक्षण और अंतरिक्ष में उपयोगी उपकरणों का निर्माण। इन सभी विषयों पर अनुसंधान करना आने वाले समय में मानवों को अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने, अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और चंद्र, मंगल और आसपास के ग्रहों पर मिशन भेजने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंतरिक्ष में आवास की योजना: एस्ट्रोनॉट का निरीक्षण

गगनयान मिशन के माध्यम से इसरो तीन अंतरिक्ष यात्री को भेजेगा। इस कार्य के लिए ऑर्बिटल मॉड्यूल का प्रयोग किया जाएगा। आसान शब्दों में, ऑर्बिटल मॉड्यूल को ‘अंतरिक्ष में निवास’ भी कहा जा सकता है। इस ऑर्बिटल मॉड्यूल को दो भागों में विभाजित किया जाएगा। पहला होगा Crew module, जिसमें क्रू यात्री निवास करेंगे, और दूसरा होगा Service modul, जहां मिशन से जुड़ी अन्य उपकरणों को रखा जाएगा।

1.Crew module: यह मॉड्यूल मिशन के दौरान अंतरिक्ष में यात्री के निवास के लिए उपयोग होगा। इसे दो परतों से तैयार किया गया है – अंदर की परत धातु की होगी और उसमें हवा भरी जाएगी। बाहरी परत में हवा का संचारन होगा और इसे सूर्य की गर्मी से बचाने के लिए विशेष परतों से ढका गया है। इसमें एस्ट्रोनॉट के आवास, खाना, सांस लेने, और सुरक्षित लौटने के व्यवस्थाओं की सुविधा होगी।

2.Service modul: इसे मिशन का सहायक कक्ष कहा जा सकता है। यह मॉड्यूल क्रू मेंबरों को हर प्रकार की सहायता प्रदान करेगा। इसमें विद्युत उत्पादन, सूर्य की किरणों से बचाव, रॉकेट प्रेरण के लिए तंत्र, और अन्य आवश्यक उपकरण शामिल होंगे।

Astronauts के लिए विशेष प्रयोग: मिशन तैयारी

एक विशेष अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग सुविधा, जो Bengaluru में स्थित है, तैयार की जा रही है ताकि Gaganyaan mission के लिए चुने हुए अंतरिक्ष यात्री को विशेष तौर पर तैयार किया जा सके। यहाँ प्रशिक्षुओं को मिशन के अग्रणीत तथ्यों के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है। प्रशिक्षण का हिस्सा है सिम्युलेटर पर अभ्यास, जीरो ग्रेविटी में काम करने की अनुभूति, विभिन्न संचार प्रणालियों का अध्ययन, और स्थितियों का निरीक्षण। इसके अलावा, चिकित्सकों की सलाह, नियमित उड़ानों का अभ्यास, और शारीरिक कसरतें भी शामिल हैं। यह प्रशिक्षण अंतरिक्ष में सुरक्षित और सफल यात्रा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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