Wednesday, 24 July 2024
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किसानों ने शंभू बॉर्डर से Delhi तक मार्च की योजना बनाई: हमारे हितों पर हानिकारक प्रभाव का दावा करते हुए 5 फसलों के लिए MSP खत्म करने के सरकारी प्रस्ताव को रिजेक्टेड कर दिया

एमएसपी की गारंटी सहित कई मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन जारी रहेगा चौथे दौर की बातचीत में सामने आए केंद्र सरकार के एमएसपी के प्रस्ताव को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज कर दिया है केंद्र सरकार की तरफ से कथित रूप से एमएसपी पर 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट का प्रस्ताव दिया गया है किसानों का कहना है कि मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर उन्हें पता चला है कि केंद्र सरकार a2+ प्लस 50% के आधार पर एमएसपी पर अध्यादेश लाने की योजना बना रही है किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सी2+ 50% से नीचे कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।


चौथे दौर की बातचीत में किसानों के सामने मक्का कपास अरहर तूर मसूर और उड़त समेत पांच फसलों की खरीद को लेकर 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट का प्रस्ताव रखा गया है हालांकि किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि वह c2+ 50% के फार्मूले के आधार पर ही एमएसपी की गारंटी चाहते हैं किसान मोर्चा ने एक बयान में कहा कि बीजेपी ने खुद 2014 के चुनाव में अपने घोषणा पत्र में इसका वादा किया था किसान मोर्चा ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग ने 2006 में अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार को सी2+ 50% के आधार पर एमएसपी देने का सुझाव दिया था.


इसी के आधार पर तमाम फसलों पर वो एमएसपी की गारंटी चाहते हैं इसके जरिए किसान अपनी फसल एक फिक्सड कीमत पर बेच सकेंगे और उन्हें नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा मोर्चा ने कहा कि अगर मोदी सरकार बीजेपी के वादे को लागू नहीं कर पा रही है है तो प्रधानमंत्री ईमानदारी से जनता को बताएं, किसान मोर्चा ने केंद्रीय मंत्रियों से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि मोदी सरकार ऋण माफी, बिजली का निजीकरण नहीं करने, सार्वजनिक क्षेत्र की फसल बीमा योजना, 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को ₹1000 मासिक पेंशन, केंद्रीय गृह राज्यी अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की मांग की है,

किसान संघ की ओर से जारी एक दृढ़ बयान में, पंजाब की सीमाओं पर प्रदर्शनकारी किसानों पर किए गए गंभीर अत्याचारों को समाप्त करने की जोरदार मांग उठाई गई है, क्योंकि वे मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों और कॉर्पोरेट को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। जनता के बीच व्याप्त अनाचार को प्रकाश में लाना। किसान संघ ने अपनी आगामी बैठक 21-22 फरवरी के लिए निर्धारित की है,

जिसका उद्देश्य भविष्य की रणनीतियों और विचार-विमर्श करना है। चाहे संतुष्टि हो या असंतोष, एक अलग चर्चा बनी हुई है, जिसके लिए प्रमुख मंचों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। एएसपीएम सहित लगभग 150 गैर-राजनीतिक संगठन, कई अन्य सहयोगी समूहों के साथ, इस प्रयास में सहयोग करते हैं। पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रस्तुत प्रस्तावों के मूल्यांकन में सभी हितधारकों को शामिल करना हमारा दायित्व बन जाता है। इसके अलावा, ऋण माफी के संबंध में सरकार का प्रस्ताव वर्तमान में सावधानीपूर्वक विचाराधीन है, एक अलग प्रस्ताव गहन परीक्षण और बहस की प्रतीक्षा में है।

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